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Friday, January 27, 2023

Class 11 Hindi Antra Chapter 8 Question Answer उसकी माँ

NCERT Solutions for Class 11 Hindi Antra Chapter 8 उसकी माँ

Class 11 Hindi Chapter 8 Question Answer Antra उसकी माँ

प्रश्न 1.
क्या लाल का व्यवहार सरकार के विरुद्ध षड्यंत्रकारी था ?
उत्तर :
लाल देशभक्त, क्रांतिकारी युवक था। वह अपने देश को ब्रिटिश सरकार की गुलामी से आजाद कराना चाहता था। इसलिए वह अपने अन्य क्रांतिकारी मित्रों के साथ मिलकर देश को स्वतंत्र कराने की योजनाएँ बनाता रहता था। उसका यह कार्य हमारी दृष्टि से उसका स्वदेश प्रेम है। इसे त्रिटिश सरकार अपने विरदद्ध घड्यंत्र मानती थी। त्रिटिश सरकार की आलोचना करने तथा उनकी चापलूसी न करने के कारण वह उनकी नजर में षड्यंत्रकारी था।

प्रश्न 2.
पूरी कहानी में जानकी न तो शासन-तंत्र के समर्थन में है न विरोध में, किंतु लेखक ने उसे केंद्र में ही नहीं रखा बल्कि कहानी का शीर्षक बना दिया। क्यों ?
उत्तर :
शीर्षक की सार्थकता के लिए यह ज़रूरी है कि शीर्षक कहानी के मूल भाव, उद्देश्य प्रमुख घटना अथवा प्रमुख पात्र से जुड़ा हुआ हो। प्रस्तुत कहानी का शीर्षक जिज्ञासामय है। कहानी पढ़ते ही पाठक के मन में यह जानने की इच्छा होती है कि उसकी माँ कौन है ? यह किसकी माँ है ? कहानी को पढ़ते ही यह जिज्ञासा शांत हो जाती है। पाठक समझ जाता है कि इस कहानी के क्रांतिकारी युवक लाल की माँ की ममता, सरलता, दृढ़ता, सेवा और त्याग का वर्णन है। कहानी की घटनाओं में माँ का बार-बार उल्लेख हुआ है।

सर्वं्र उसी के व्यक्तित्व की छाप दिखाई देती है। वह केवल अपने इकलौते बेटे लाल से ही प्यार नहीं करती बल्कि लाल के अन्य सभी साथियों के प्रति भी वह ममतामयी है। वह भारतमाता के समान है। वह सब का कल्याण करना चाहती है। लाल तथा उसके साथियों को फाँसी होते ही उसके भी प्राण पखेरू उड़ जाते हैं। अत: कहा जा सकता है कि कहानी का शीर्षक सर्वथा उपयुक्त है क्योंकि सारी कहानी में जानकी किसी-न-किसी रूप में उपस्थित है। वह परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपना भी बलिदान दे देती है।

प्रश्न 3.
चाचा जानकी तथा लाल के प्रति सहानुभूति तो रखता है, किंतु वह डरता है। यह डर किस प्रकार का है और क्यों है ?
उत्तर :
चाचा एक जर्मीदार है। उसे ब्रिटिश सरकार से बहुत सहायता मिलती है। वह भी उनकी चापलूसी करता रहता है। जब पुलिस सुपरिटेंेेंट उससे लाल के बारे में पूछताछ करने आता है तो जाते हुए उसे चेतावनी दे जाता है कि वह लाल और उसके परिवार से दूर ही रहे। इससे वह डर जाता है कि कही उसे भी ब्रिटिश सरकार का कोपभाजन न बनना पड़े। इसी डर से वह चाहते हुए भी लाल तथा उसके परिवार की कोई सहायता नहीं कर पाता।

प्रश्न 4.
इस कहानी में दो तरह की मानसिकता का संघर्ष, एक का प्रतिनिधित्व लाल करता है और दूसरे का उसका चाचा। आपकी नज्कर में कौन सही है ? तर्कसंगत उत्तर दीजिए।
उत्तर :
हमारी नजर में लाल की सोच बिलकुल सही है। वह गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़े हुए अपने देश को आज़ाद कराना चाहता है। उसका मानना है कि जो व्यक्ति समाज या राष्ट्र के नाश पर जीता हो, उसका सर्वनाश हो जाना चाहिए। ब्रिटिश सरकार जोंक की तरह भारतवासियों के धर्म, प्राण और धन को चूसती चली जा रही है। इन्होंने ऐसे अपमानजनक और मानवताहीन नीति-मर्दक कानून गढ़े हैं जिससे भारतवासियों का निरंतर शोषण होता है। ऐसी सरकार का विरोध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देनेवाले लाल की मानसिकता का हम समर्थन करते हैं।

प्रश्न 5.
उन लड़कों ने कैसे सिद्ध किया कि जानकी सिर्फ़ माँ नहीं भारतमाता है ? कहानी के आधार पर उसका चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
उन लड़कों ने जानकी को भारतमाता सिद्ध करते हुए बताया कि उसका सिर हिमालय, माथे की दोनों गहरी रेखाएँ गंगा और यमुना, नाक विंध्याचल, ठोढ़ी कन्याकुमारी, झुरियाँ-रेखाएँ पहाड़ और नदियाँ तथा बाएँ कंधे पर लहराते हुए बाल बर्मां है। इस प्रकार लाल की माँ भारत-माता बन जाती है।
जानकी के चरित्र की अन्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) परिच्रय – पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ द्वारा रचित कहानी ‘उसकी माँ’ में लाल की माँ जानकी का चरित्र-चित्रण अत्यंत प्रभावशाली रूप से किया गया है। उसके पति रामनाथ का देहांत हो चुका है। उसकी एकमात्र संतान उसका पुत्र लाल है। वह वृद्धा विधवा स्त्री है। उसके सिर के बाल सक़ेद हो घुके हैं तथा चेहरे पर अनेक झुरियाँ पड़ गयी हैं।

(ii) सरलता – लाल की माँ अत्यंत सरल महिला है। लाल और उसके मित्रों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध रचे जा रहे षड्यंत्र को वह समझ नहीं पाती। जर्मीदार द्वारा लाल और उसके मित्रों की शिकायत करने पर भी वह उन्हें निर्दोष मानती है। इसलिए ज़्मीदार को कहती है कि वह ही बच्चों को समझा दे। उसके पुत्र तथा पुत्र के मित्रों पर जब मुकदमा चलता है तो वह अपनी सरलता के कारण ही अंग्रेज सरकार को न्यायी समझकर बच्चों की रिहाई के प्रति आशावान थी। वह किसी प्रकार का छल-कपट नहीं जानती।

(iii) ममता – लाल की माँ के हदय में ममता का सागर उमड़ता रहता है। वह लाल के साथियों को भी लाल के समान ही स्नेह करती है। बंगड़ जब उसे भारतमाता प्रमाणित करता है तो वह भाव-विभोर हो उठती है। लाल तथा उसके मित्रों को वह भूखा नही देख पाती। उनके लिए सदा कुछ भी करने के लिए तैयार रहती है। जेल में उनके लिए, अपने घर की बस्तुएँ तक बेचकर, खाना बनाकर ले जाती है।

(iv) दूड़ता – लाल की माँ संकट के क्षणों में भी विचलित नहीं होती अपितु प्रत्येक मुसीबत का दृढ्तापूर्वक सामना करती है। अपने पति का देहांत होने पर भी वह सामान्य स्त्रियों के समान नहीं रोई थी। लाल तथा उसके मित्रों के जेल चले जाने पर भी उसने प्रत्येक स्थिति का दृढ़ता से सामना किया था तथा किसी-न-किसी प्रकार से वकील करके उनकी पैरवी करती रही थी।

(v) सेवा – लाल की माँ में सेवा-भाव कूट-कूटकर भरा हुआ है। लाल और उसके साथियों की सेवा करने में उसे बहुत आनंद् प्राप्त होता है। वह जेल में उनके लिए पराँठे, हलवा, तरकारी आदि बनाकर ले जाती है। बच्चों को मुक्त कराने के लिए बह वकीलों के सामने गिड़गिड़ाने से भी नहीं झिझकती थी। उसने उन्हैं जेल से छुड़ाने के लिए बहुत प्रयास किए थे। इस प्रकार स्पष्ट है कि लाल माँ की एक ऐसी असाधारण नारी है जो अपनी सरलता, ममता, दृढ़ता एवं सेवाभाव से पाठक को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लेती है ।

प्रश्न 6.
विद्रोही की माँ से संबंध रखकर कौन अपनी गरदन मुसीबत में झालता ? इस कथन के आधार पर उस शासन-तंत्र और समाज-व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
उस समय देश ब्रिटिश सरकार का गुलाम था। उनकी शासन व्यवस्था मानवताहीन नीतियों से युक्त थी। वे भारतीय जनता का शोषण करते थे तथा गरीबों को चूसकर अपना बल बढ़ा रहे थे। देशभक्तों को वे भयंकर यातनाएँ देते थे। पुलिस मनमानी करती थी। अदालत बिना उचित सुनवाई किए मनमाना दंड दे देती थी। समाज में लोग ब्रिटिश सरकार की कार्रवाइयों से भयभीत रहते थे। सभी अपनी जान बचाने की सोचते थे। उनके अनुसार ‘आप सुखी तो जग सुखी’ कथन के अनुसार जीवन व्यतीत करना ही ठीक है। वे इतने भयभीत रहते थे कि चाहकर भी किसी स्वतंत्रता ग्रेमी की सहायता नहीं करते थे। सभी स्वार्थी तथा चापलूस बन गए थे।

प्रश्न 7.
चाचा ने लाल का पेंसिल-खचित नाम पुस्तक की छाती पर से क्यों मिटा डालना चाहा ?
उत्तर :
चाचा ने लाल का पेंसिल से पुस्तक के पहले पन्ने पर लिखा नाम इसलिए मिटा डालना चाहा कि कहीं पुलिसवाले तलाशी लेने आएँ तो उन्हैं यह किताब न मिल जाए। इसपर लिखे लाल के नाम से उसका संबंध भी लाल तथा अन्य क्रांतिकारियों के साथ जोड़कर उसे भी ब्रिटिश सरकार का विरोधी जानकर दंड मिल सकता है।

प्रश्न 8.
‘ऐसे दुष्ट, व्यक्ति-नाशक राष्ट्र के सर्वनाश में मेरा भी हाथ हो’ के माध्यम से लाल क्या कहना चाहता है ?
उत्तर :
इस कथन के माध्यम से लाल यह कहना चाहता है कि उसकी इच्छा है कि वह ऐसी ब्रिटिश सरकार का अंत करने में अपना पूरा योगदान देना चाहता है जो अपनी दुष्टता से भारतीय जनता को गुलाम बनाकर उनका शोषण कर रही है। वह इसके लिए आत्म-बलिदान देने के लिए भी तैयार है। इसलिए वह हँसते-हैसते फॉँसी चढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
(क) पुलिसवाले केवल संदेह पर भले आदमियों के बच्चों को त्रास देते हैं, मारते हैं, सताते हैं। यह अत्याचारी पुलिस की नीचता है। ऐसी नीच शासन-प्रणाली को स्वीकार करना अपने धर्म को, कर्म को, आत्मा को, परमात्मा को भुलाना है। धीरे-धीरे घुलाना-मिटाना है।
(ख) चाचा जी, नष्ट हो जाना तो यहाँ का नियम है। जो सँवारा गया है वह बिगड़ेगा ही। हमें दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए। कर्म के समय हमारी भुजाएँ दुर्बल नहीं, भगवान की सहत्र भुजाओं की सखियाँ हैं।
उत्तर :
(क) ब्रिटिश सरकार की पुलिस भारतीयों के अच्छे घर के बच्चों को मात्र संदेह के आधार पर दंड देती थी। इसलिए इस प्रकार की अत्याचारी शासन-प्रणाली को स्वीकार करना क्रांतिकारी देश-भक्त अपने धर्म, कर्म, आत्मा और परमात्मा के विरुद्ध मानकर उनका विरोध करते थे।
(ख) कहानी में लाल इस बात को स्वीकार करता है कि अंग्रेज़ों की शक्ति की तुलना में भारत को स्वतंत्र करानेवालों की शक्ति बहुत कम है किंतु इसपर भी वह देश को स्वतंत्र कराने के अपने निश्चय पर अडिग है। उसे विश्वास है कि जब कोई मनुष्य दृढ़ निश्चयपूर्वक किसी कार्य को संपन्न करने में जुए जाता है तो उसमें कार्य करने की अपार क्षमता आ जाती है। कर्म में लीन व्यक्ति को परमात्मा भी पूरी सहायता देते हैं। कर्मशील व्यक्ति को ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अकेला नहीं है अपितु भगवान के सहस्तों के हाथ भी उसकी सहायता कर रहे हैं। भाव यह है कि शारीरिक दृष्टि से कमजोर व्यक्ति भी निष्ठा और लगन से कठिन-से-कठिन कार्य भी सफलतापूर्वक कर लेता है।

योग्यता-विस्तार –

प्रश्न 1.
पुलिस के साथ दोस्ती की जानी चाहिए या नहीं ? अपनी राय लिखिए।
प्रश्न 2.
लाल और उसके साधियों से आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
प्रश्न 3.
‘उसकी माँ’ के आधार पर अपनी माँ के बारे में कहानी लिखिए।
उत्तर :
1. हमारे विचार से पुलिस से न तो दोस्ती करनी अच्छी और न ही दुश्मनी। हमें इनके साथ संतुलित व्यवहार करना चाहिए। जितनी आवश्यकता हो उतनी उनसे बातचीत करनी चाहिए। उनसे व्यर्थ में तर्क-वितर्क नहीं करना चाहिए। पुलिसवालों से अधिक घुलना-मिलना भी नहीं चाहिए। कई बार हम अनचाहे ही कुछ ऐसा कह या कर जाते हैं कि उसका वे नाज़ायज लाभ उठा सकते हैं। इसलिए पुलिसवालों से केवल उतना ही व्यवहार रखना चाहिए जिससे न तो अपनी हानि हो और न ही वे हमें कोई हानि पहुँचा सकें। वे भी प्रसन्न रहें और हम भी सामान्य जीवन जी सकें।

2. लाल और उसके साथियों से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम राष्ट्र-विरोधी ताकतों तथा शोषणकर्ताओं का डटकर विरोध करें तथा अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए, उसे स्वाधीन बनाए रखने के लिए अपने प्राणों तक का बलिदान दे दें।

3. मेरी माँ सबसे प्यारी तथा सबसे न्यारी है। वह सुबह कब उठ जाती है मुझे पता ही नहीं चलता। उसके कोमल हाथ मुझे सहलाते हुए उठाते हैं और मैं नाटक करते हुए न उठने का बहाना किए रहती हूँ। उनका प्यार मुझे हर कदम पर उत्साहित करता रहता है। वे मेरी माँ के साथ-साथ सबसे प्यारी सखी भी हैं। मेरे मन की सब बातें बिना मेंरे कहे ही त्ये जान जाती हैं। वे मेरी शिक्षिका, पथ-प्रदर्शिका और न जाने क्या-क्या हैं ? वे मेरी सुख-दुख की घड़ियों में मेरे सबसे नजदीक हैं। मुझे अपनी माँ पर गर्व है।

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प्रश्न 1.
पुलिसवाले ने लाल के चाचा को लाल से सावधान और दूर रहने का सुझाव क्यों दिया ?
उत्तर :
लाल के चाचा कट्टर राजभक्त थे। पुलिस अधिकारी ने उन्हें लाल से सावधान रहने के लिए इसलिए कहा क्योंकि लाल एक क्रांतिकारी तथा राजद्रोही युवक था। वह ब्रिटिश सरकार से देश को आज्ञाद कराना चाहता था। ऐसे राजट्रोही से दूर रहने में ही लाल के चाचा की कुशलता थी नहीं तो उन्हें भी राजद्रोह के अपराध में दंड मिल सकता था।

प्रश्न 2.
इस कहानी में अंग्रेज़ सरकार को धर्मात्मा, विवेकी और न्यायी सरकार क्यों कहा गया है ?
उत्तर :
इस कहानी में ज्रमींदार ने अंग्रेज़ सरकार को धर्मात्मा, विवेकी और न्यायी सरकार कहा है क्योंकि वह अंग्रेज़ सकार का कट्टर भक्त है तथा पिछली कई पीढ़ियों से उसका परिवार राजभक्त रहा था। उसे सरकार से सब प्रकार की सुख-सुविधाएँ भी प्राप्त थीं। वह इन सुविधाओं से वंचित नहीं होना चाहता था। इस कारण वह अंग्रेज़ सरकार को धर्मात्मा, विवेकी तथा न्यायी मानता है।

प्रश्न 3.
“धीरे-धीरे जोंक की तरह हमारे देश का धर्म, प्राण और धन चूसती चली जा रही है यह शासन-प्रणाली।” लाल के साथियों के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं ?
उत्तर :
हम लाल के मिश्रों के इस कथन से पूरी तरह सहमत हैं। अंग्रेज मूल रूप से व्यापारी थे जो शासक बनकर हमारा निरंतर शोषण करते रहे। लालच और भय दिखाकर उन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार किया तथा हिंदुओं को ईसाई बना लिया। भारतवासियों पर उन्होंने अमानुषी अत्याचार किए तथा उनकी हत्याएँ भी कीं। यहाँ के उद्योग-धंधों को नष्ट कर विदेशी माल बेच-बेचकर इस देश की आर्थिक स्थिति को भी उन्होंने शोचनीय बना दिया था। इस प्रकार जन तक अंग्रेज़ भारत में रहे वे जोंक की तरह इस देश का धर्म, प्राण और धन चूसते रहे।

प्रश्न 4.
लाल के साथियों का माँ ने जो चित्र खींचा, उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर :
माँ के अनुसार लाल के साथी लापरवाह और बातूनी हैं। उनकी बातों का कोई अर्थ नहीं होता। वे अत्यंत सीधे-साधे तथा भोले-भाले हैं। वे सदा खुलकर हँसते रहते हैं। उसे भारत माँ कहकर पुकारते हैं। वे अपराधी नहीं हैं। वे सरल प्रकृति के तथा छल-कपट से मुक्त हैं।

प्रश्न 5.
‘उसकी माँ’ कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘उग्र’ जी द्वारा रचित कहानी ‘उसकी माँ’ का प्रमुख उद्देश्य परतंत्र भारत के राजनीतिक वातावरण का यथार्थ चित्रण करते हुए यह बताना है कि किस प्रकार उस युग में देश को स्वतंत्र कराने के लिए लाल जैसे नवयुवक हैंसते-हैसते अपने प्राणों को बलिदान कर देते थे। लाल जैसे युवकों की माताएँ भी जानकी के समान अपने पुत्र को भी मातृभूमि के लिए न्योछावर कर देती थीं। इस कहानी से यह भी ज्ञात होता है कि कुछ सुविधाभोगी वर्ग के लोग अपने सुखों के लिए अंग्रेजों की गुलामी करना पसंद करते थे।

प्रश्न 6.
‘उसकी माँ’ कहानी के आधार पर लाल का चरित्र-चित्रण कीजिए।
उत्तर :
पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ द्वारा रचित कहानी ‘उसकी माँ’ में लाल का महत्वपूर्ण स्थान है। वह लंबा, सुडौल, सुंदर तथा तेजस्वी युवक है। वह स्वर्गीय रमानाथ तथा जानकी की एकमात्र संतान है। वह कॉलेज में अध्ययन करता है। वह एक जागरूक युवक है। वह पराधीन भारत पर हो रहे अंग्रेजी सरकार के अत्याचार को सहन नहीं कर सकता अतः वह क्रांति का मार्ग अपना लेता है। उसके हृदय में देशभक्ति की भावनाएँ हिलोरें ले रही हैं। वह भारत की पराधीनता की जजीरों को छिन्न-ििन्न करने के लिए आतुर है।

उसे अपनी शक्ति और सामर्थ्य पर विश्वास है। उसमें नेतृत्व का गुण विद्यमान है। उसके साथी उसके इशारे पर अपनी जान तक न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं। पुलिस-विभाग में भी वह क्रांतिकारियों के नेता के रूप में जाना जाता है। लाल के घर का घेराव करके पुलिस उसे तथा उसके साथियों को पकड़कर ले जाती है। स्वतंत्रता प्रेमी होने के कारण लाल निडर एवं साहसी है। जमीदार उसे समझाता है कि वह इन दुर्बल हाथों से शब्तिशाली सरकार से टक्कर नहीं ले सकता। टक्कर लेने का अर्थ नष्ट होना है। तभी वह निडर होकर कहता है, कर्म के समय हमारी भुजाएँ दुर्बल नहीं, भगवान की सहस्न भुजाओं की सखियाँ हैं।” लाल देश-भक्त होने के साथ-साथ मातृ-भक्त भी है। वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता है। वह अपनी फाँसी की बात माँ से छ्छिपाकर रखता है। वह जानता है कि माँ का कोमल हूदय इतने बड़े आघात को सहन नहीं कर पाएगा। अत: लाल एक देश-भक्त, क्रांतिकारी, निर्भीक, उत्साही तथा मातृ-भक्त युवक है।

प्रश्न 7.
‘उसकी माँ’ कहानी के आधार पर लाल के चाचा अर्थात ज़र्मींदार का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :
उग्र द्वारा रचित कहानी ‘उसकी माँ’ में ज़मींदार का चरित्र विशेष महत्व रखता है। वह अंग्रेजी सरकार का पक्षधर है। पुलिस-पति जब लाल के विषय में पूछताछ करने के लिए आता है तो वह अपनी राजभक्ति स्पष्ट करता हुआ कहता है-‘ हम तो सात पुश्त से सरकार के फरमांबरदार हैं।’ वह लाल की माँ के सामने भी अंग्रेज्ज सरकार की प्रशंसा करता है। लाल भी उसे कट्टर राजभक्त कहता है। उसके पुस्तकालय में सभी पुस्तकें अंग्रेज़ी लेखकों की हैं।

ज़र्मीदार को लाल तथा उसकी माँ से सहानुभूति है। लाल का पिता रमानाथ जब तक जीवित रहा, उसकी ज्रींदारी का मैनेजर रहा। ज़र्मींदार की लाल तथा उसकी माँ के प्रति सहानुभूति तो है किंतु अंग्रेज़ सरकार के भय से वह उनकी कोई सहायता नहीं कर पाता। वह अपनी किसी पुस्तक पर लाल के हस्ताक्षर देखकर भी घबरा उठता है। वह रबड़ उठाकर उस पुस्तक पर से उसका नाम मिटाने लगता है। इस प्रकार प्रस्तुत कहानी में ज्रींदार पराधीन भारत के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है जिसने अपने स्वार्थ की पूर्ति तथा अपनी सुख-सुविधाओं के लिए सरकार का साथ दिया था।

प्रश्न 8.
लाल ने अपने पत्र में अपनी माँ को क्या लिखा था ?
उत्तर :
यह पत्र लाल ने जेल से अंतिम बार अपनी माँ को लिखा था। लाल का चाचा लाल की माँ को यह पत्र पढ़कर सुनाता है। लाल ने अपनी माँ को संबोधित करके इस पत्र में लिखा था कि माँ, जिस दिन तुम्हें मेरा यह पत्र मिलेगा उसी दिन सुबह वह प्रभातकालीन सूर्य के किरण रूपी रथ पर सवार होकर दूसरे लोक चला जाएगा अर्थात उसे फाँसी हो जाएगी। वह कहता है कि अपनी अंतिम इच्छा व्यक्त कर वह उससे मिल सकता था पर उसे इस मिलन में कोई लाभ प्रतीत नही हो रहा था। उसे विश्वास है कि उसकी माँ अनेक जन्मों में भी उसकी माँ ही रहेगी। अतः वह उसे समझाता है कि वह उससे कहीं दूर नहीं जा रहा है। वह उसे विश्वास दिलाता है कि जब तक वायु बह रही है, सूर्य अपना प्रकाश फैला रहा है, सागर लहरा रहा है तब तक उसे उसकी ममतामयी गोद से कोई भी दूर नहीं कर सकता। भाव यह है कि वह सदा उसकी माँ का बेटा बनकर ही जन्म लेना चाहता है।

प्रश्न 9.
‘यह बुरा है, लाल की माँ’ यह कथन किसका है और इस कथन का अभिप्राय क्या है ?
उत्तर :
कहानी में यह कथन ज़्मीदार का है। जब ज़र्मींदार को लाल की माँ से यह ज्ञात होता है कि लाल तथा उसके साथी ब्रिटिश सरकार से देश को आज़ाद कराने की बातें करते रहते हैं तो वह लाल की माँ को समझाते हुए कहता है कि इनकी ये बारें बहुत खतरनाक हैं क्योंकि सरकार के विरुद्ध बोलने से सरकार उन्हें कभी भी दंडित कर सकती है। इस पंक्ति में लाल का चाचा लाल को समझाता है कि लाल का अंग्रेज्ञों से विरोध, उसके लिए हानिकारक है।

प्रश्न 10.
लाल के मित्र आपस में क्या बातें करते हैं ?
उत्तर :
लाल का चाचा जब लाल की माँ से पूछता है कि लाल और उसके मित्र किस प्रकार की बातें करते हैं तो लाल की माँ उन्हें बताती है कि भारतमाता की तथा अन्य अनेक प्रकार की बातें करते रहते हैं। एक दिन वे अत्यंत उत्तेजित स्वर में कह रहे थे कि सरकार लड़कों को पकड़ रही है। वे कहते थे कि पुलिस केवल संदेह के आधार पर भी अच्छे-अच्छे परिवार के लड़कों को पकड़कर ले जाती है तथा उन्हें बहुत कष्ट देती है। वे उन बच्चों को मारते, पीटते और अनेक प्रकार से सताते भी हैं। इसे वे लड़के पुलिस की अत्याचार और नीचता मानते हैं। ठन लड़कों के अनुसार इस प्रकार की नीच हरकतोंवाली शासन-प्रणाली को स्वीकार करके अपने धर्म, कर्म, आत्मा तथा परमात्मा को धोखा देना है। इस प्रकार हम अपने आपको धीरे-धीरे नष्ट कर देते हैं तथा हमारा अस्तित्व भी समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 11.
ब्रिटिश सरकार भारतीयों को शिक्षित क्यों नहीं करना चाहती ?
उत्तर :
लाल की माँ लाल के चाचा को यह बता रही है कि लाल और उसके मित्र आपस में किस प्रकार की बातें करते हैं। वह बताती है कि एक दिन लाल का एक मित्र कह रहा था कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों को इसलिए पढ़ाना-लिखाना नहीं चाइती कि कहीं वे अपना अधिकार न माँगने लगें। वह कहता है कि लोग पढ़-लिखकर जागरूक न हो जाएँ इस कारण त्रिटिश सरकार भारतीयों को पढ़ने-लिखने नहीं देती तथा जो पढ़ते-लिखते है उन्हें भी अंग्रेजी ढंग की शिक्षा दी जाती है।

अंग्रेजी सरकार ने इस कारण ऐसे अपमानजनक तथा मानवता से रहित नीति-विरुद्ध नियम बनाए हैं जिससे लोगों में वीर भावनाएँ न पनप सके तथा वे उनकी गुलामी से आजाद न हो सकें। यह सरकार गरीबों का शोषण कर अपनी सेना को शराब, कबाब आदि खिला-पिला कर मोटा-ताजा बनाए रखती है जिससे भारतीयों पर अत्याचार किया जा सके। यह सरकार धीरि-धीरे इस देश में धर्म, मनुष्यों तथा धन संपत्ति को इस प्रकार नष्ट करती जा रही है जैसे जोंक खून चूसती है। इस प्रकार से ब्रिटिश सरकार भारतीयों का पूर्ण रूप से शोषण कर रही है।

प्रश्न 12.
‘उसकी माँ’ कहानी किसकी रचना है तथा इसमें कहानीकार ने क्या कहना चाहा है ?
उत्तर :
‘उसकी माँ’ कहानी लेखक पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ द्वारा रचित है। यह कहानी लेखक की स्वाधीनता से प्रेरित कहानी है। इस कहानी में लेखक ने देश को आजाद कराने के लिए कुछ युवकों द्वारा दिए गए बलिदान का मर्मस्पर्शी चित्रण किया है। साथ ही साथ यह भी बताया है कि किस प्रकार एक बूढ़ी माँ अपने इकलौते पुत्र को देश पर न्योछावर कर देती है।

प्रश्न 13.
‘उसकी माँ’ कहानी का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर :
‘उसकी मां’ कहानी में उग्र जी ने स्वतंत्रता संग्राम में एक माँ की ममता, युवकों का अपने देश के प्रति प्रेम, समर्पण, अंग्रेजों का दमन, ज्ञमींदारों की राजशक्ति आदि का बड़ा ही हदय चिदारक चित्रण किया है। यह कहानी लोगों में देशप्रेम की भावना जागृत करती है। यह कहानी रूस के महान लेखक मैक्सिम गोर्की की महान रचना ‘माँ’ की याद दिलाती है। यह कहानी भारतमाता और माँ दोनों की ओर हमारा ध्यान लगाती है। अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण यह अत्यंत मार्मिक बन पड़ी है।

प्रश्न 14.
‘उसकी माँ’ कहानी में उग्र जी की भाषा शैली स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
उग्र जी हिंदी साहित्य जगत में विद्रोही कहानीकार के रूप में विख्यात हैं। इनकी रचनाओं में राष्ट्रीय भावना कूट-कूटकर भरी हुई है। उनकी भाषा सरल, सहज एवं भाषानुकूल है। उनकी भाषा सरल, सुबोध तथा मर्मस्पर्शी भी है। उनके द्वारा गठित छोटे-छोटे वाक्य देखते ही बनते हैं। मुहावरों के प्रयोग से भाषा में रोचकता आ गई है। ‘उसकी माँ’ कहानी में उग्र जी ने आत्मकथात्मक शैली का प्रयोग किया है। उन्होंने चित्रात्मक शैली का भी बड़ा सुंदर-सहज प्रयोग किया है। इनकी कहानियों की संवाद-योजना बड़ी ही सटीक है।

प्रश्न 15.
नई पीढ़ी देश की दुर्दशा का ज़िम्मेदार किसे मानती है और क्यों ?
उत्तर :
देश की युवा पीढ़ी देश की दुरावस्था का जिम्मेदार शासन-तंत्र को मानती है। वह इस शासन तंत्र को उखाड़ फेंकना चाहती है। दुष्ट, व्यक्ति-नाशक राष्ट्र के सर्वनाश में अपना योगदान ही इस पीढ़ी का सपना है। यथार्थ के तूफ़ानों से बेपरवाह यह पीढ़ी जानती है कि नष्ट हो जाना तो यहाँ का नियम है। जो सँवारा गया है वह बिगड़ेगा ही। हमें दुर्बलता के डर से अपना काम नहीं रोकना चाहिए।

प्रश्न 16.
नई पीढ़ी और पूर्ववर्ती पीढ़ी के विचारों में किस प्रकार का अंतर है ? पाठ के आधार पर समझाइए।
उत्तर :
पूर्ववर्ती पीढ़ी का बुद्धिजीवी समाज अपनी सुविधा के लिए राजसत्ता के तलवे चाटने को तैयार है। वहीं नई पीढ़ी का विद्रोही स्वर राजसत्ता के विद्रोह की मशाल लिए खड़ा है। इन दोनों के बीच एक माँ जो अपना बेटा चाहती है। समाज के दो सिरों के बीच खड़ी ममतामयी माँ लाख कोशिशों के बावजूद व्यवस्था की चक्की से अपने बेटे को बचा नहीं पाती है।

प्रश्न 17.
लाल के मित्र ने लाल की माँ को भारतमाता का स्वरूप कैसे दिया ?
उत्तर :
एक दिन जब लाल की माँ उसके मित्रों को हलवा परोस रही थी तब उसके एक मित्र ने उसकी माँ की ओर देखकर कहा-“माँ तू तो ठीक भारतमाता-सी लगती है। तू बूढ़ी, वह बूढ़ी। उसका उजला हिमालय है, तेरे केश। हाँ नक्शे से साबित करता हूँ। तू भारतमाता है। सिर तेरा हिमालय……… माथे की दोनों गहरी बड़ी रेखाएँ गंगा और यमुना, नाक विंध्याचल, ठोढ़ी कन्याकुमारी तथा छोटी बड़ी झुरिंयाँ-रेखाएँ भिन्न-भिन्न पहाड़ और नदियाँ हैं। ज़रा पास आ मेंरे । तेरे केशों को पीछे से आगे बाएँ कंधे पर लहरा दूँ। वह बर्मा बन जाएगा। बिना उसके भारत माता का शृंगार शुद्ध न होगा।”

11th Class Hindi Book Antra Questions and Answers 

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